Sunday, November 17, 2019
Monday, November 4, 2019
Friday, October 18, 2019
Tuesday, October 8, 2019
तेरे दम से जीवन की अभिव्यंजना...
![]() | ||
| चित्र शीर्षक : देवी दुर्गा, शक्ति की अभिव्यक्ति चित्र साभार : श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी का फेसबुक पन्ना चित्र अधिकार : सुचेता प्रियाबादिनी |
तू पाखंड कुचे
तू उद्दंड भच्छे
तू ब्रह्मांड
का आनंद रचेतू उद्दंड भच्छे
तू ब्रह्मांड
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तू उत्सव क्रीड़ा,
तू प्रसव पीड़ा,
वो हरदम हारा,
जो तुझसे है भिड़ा I
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तू आरंभ की मौलिक गर्जना,
तू प्रारंभ की मौलिक सर्जना,
तू जीवन का हँसना रोना,
तेरे दम से जीवन की अभिव्यंजना I
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पश्चलिपि: यह रचना श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी की चित्र कृति "देवी दुर्गा, शक्ति की अभिव्यक्ति" से प्रेरित है I मैने जिस विश्वविद्यालय से स्नातकोतर( प्रबंधन) की पढ़ाई की है, श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी वहाँ निदेशक पद पे कार्यरत है I इस तरह से मेरा रिश्ता उनसे गुरु शिष्य का है और इसी रिश्ते के आधार पर मैं उनकी चित्राकृतियों को शब्दों में आकर देने का साहस कर पाता हूँ I चित्राकृति को शाब्दिक स्वरूप देते समय मेरा प्रयास चित्रकार के कलात्मक मन को पढ़ने का होता है, लेकिन मैं अपने प्रयास में कितना सफल हो पता हूँ,ये तो पाठकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है I
Friday, October 4, 2019
Monday, September 30, 2019
सुनो एक कहानी सुनाते हैं...
सुनो एक कहानी
सुनाते हैं,
कुछ आँखों का पानी सुनाते हैं,
कुछ दुनिया ये फानी सुनाते हैं I
कुछ आदम हौआ की जवानी सुनाते हैं,
कुछ उनके औलादों की बिखरी ज़िंदगानी सुनाते हैं I
कुछ युद्ध की वीरानी सुनाते हैं ,
कुछ बुद्ध की ज़ुबानी सुनाते हैं I
कुछ राधा रूमानी सुनाते हैं,
कुछ मीरा दीवानी सुनाते हैं I
कुछ बीती डगर सुहानी सुनाते हैं,
कुछ आती सहर रूहानी सुनाते हैं,
कुछ आँखों का पानी सुनाते हैं,
कुछ दुनिया ये फानी सुनाते हैं I
कुछ आदम हौआ की जवानी सुनाते हैं,
कुछ उनके औलादों की बिखरी ज़िंदगानी सुनाते हैं I
कुछ युद्ध की वीरानी सुनाते हैं ,
कुछ बुद्ध की ज़ुबानी सुनाते हैं I
कुछ राधा रूमानी सुनाते हैं,
कुछ मीरा दीवानी सुनाते हैं I
कुछ बीती डगर सुहानी सुनाते हैं,
कुछ आती सहर रूहानी सुनाते हैं,
सुनो एक कहानी
सुनाते हैं...
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Thursday, September 26, 2019
Monday, September 23, 2019
किसी को क्या मालूम...
किसी को क्या मालूम,
हम आँखों में क्या छुपाए बैठे हैं ?
उससे बिछूड़ने का गम, उसकी यादों का शबनम,
और टूटे ख्वाबों के कुछ शीशे गड़ाए बैठे हैं I
किसी को क्या मालूम,
हम आँखों में क्या छुपाए बैठे हैं ?
वो जागती रातों की नींद, वो बिखरी उम्मीद,
और कुछ मुर्दा एहसासों की प्रीत छुपाए बैठे हैं I
किसी को क्या मालूम,
हम आँखों में क्या छुपाए बैठे हैं ?
वो गुज़री हुई हर बात, किस्मत की रूठी रात
और डाँवाडोल अपनी औकात छुपाए बैठे हैं
किसी को क्या मालूम,
हम आँखों में क्या छुपाए बैठे हैं ?
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Friday, September 13, 2019
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा !
![]() |
| चित्र शीर्षक : वी द थ्री सिस्टर्स चित्र साभार : श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी का फेसबुक पन्ना चित्र अधिकार : सुचेता प्रियाबादिनी |
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इन चेहरों पे छपता मिटता,
एहसासों के क़िस्सों का ककहरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इस चेहरों में लुकता छुपता,
आयुष के अंकों का फेरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इन चेहरों में मिलता मुस्काता,
मेरे तेरे अंतस का डेरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इन चेहरों में हँसता बसता,
पुरखों के आशीषों का पहरा I
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आयुष: उम्र
अंतस : मन
पश्चलिपि: यह रचना श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी के चित्रकारी "वी द थ्री सिस्टर्स " से प्रेरित है I
इन चेहरों पे छपता मिटता,
एहसासों के क़िस्सों का ककहरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इस चेहरों में लुकता छुपता,
आयुष के अंकों का फेरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इन चेहरों में मिलता मुस्काता,
मेरे तेरे अंतस का डेरा I
तेरा चेहरा... मेरा चेहरा,
इन चेहरों में हँसता बसता,
पुरखों के आशीषों का पहरा I
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आयुष: उम्र
अंतस : मन
पश्चलिपि: यह रचना श्रीमती सुचेता प्रियाबादिनी के चित्रकारी "वी द थ्री सिस्टर्स " से प्रेरित है I
Saturday, September 7, 2019
Tuesday, September 3, 2019
Monday, September 2, 2019
Friday, August 30, 2019
Wednesday, August 21, 2019
Saturday, August 17, 2019
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