Tuesday, October 20, 2026

जो बस में होता मेरे...



चित्र साभार :  Google AI


 जो बस में होता मेरे,

मैं लिख देता तुम्हारे...

आसमान में सिर्फ सवेरे I 


जो बस में होता मेरे ,

मैं  लिख देता तुम्हारी...

किस्मत में रौशनी के फेरे I 


जो बस में होता मेरे,

तो गूंथ देता तुम्हारे बालों में ...

सूरज की किरणों के डेरे I 


जो बस में होता मेरे,

तो बुन देता तुम्हारी...

ओढ़नी में चाँद तारे सुनहरे I 


पुनश्च : मेरी छोटी बहन गुड्डन के लिए 

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समय की रूई का महल!

 समय की रूई का महल ,

मोम की मानिंद पिघल रहा है I 

दिन रात में, रात दिन में, 

जल्दी जल्दी बदल रहा है I 

कितना  कुछ करना बाक़ी है ,

गिनती शुरू हो गई है , बारी आने वाली है ,

मन डर रहा है, दिल दहल रहा है I 

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एक जाल है...

एक जाल है,

इसमें उलझी ज़िन्दगी एक कमाल है I 


एक दरिया है ,

आंखें दिल पोंछने का ज़रिया  है I 


एक रोग है ,

ज़िन्दगी मुसलसल एक योग है I 


एक सूरज है,

ज़िन्दगी उगता डूबता धीरज है I 

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Thursday, October 8, 2026

लिखना है तो कलंदर से सीखो...

 लिखना है तो कलंदर से सीखो ,

जो रोज़ गहरे डूबता और निखरता है I 

जीना है तो समंदर से सीखो ,

जो रोज़ आग उगलता और निगलता है I

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कुछ लोग...

 जीते तो हैं सब लोग,

पर ज़िन्दगी को दूर से तकते हैं कुछ लोग I 

दौड़ते तो है सब लोग,

पर मंज़िल को दूर से तकते हैं कुछ लोग I 

संवारते तो हैं सब लोग,

पर ज़िन्दगी को उजड़ते देखते हैं कुछ लोग I 

कौन हैं ये कुछ लोग ?

आप नहीं जनाब ,

ये हम हैं, हम हीं हैं वो कुछ लोग I 

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Wednesday, October 7, 2026

दरिया, समंदर एक तरफ...

दरिया, समंदर एक तरफ ,

उसकी आँखों का मंतर एक तरफ I

शाख, शजर एक तरफ ,

उसकी जुल्फों का मंतर एक तरफ I

दुनिया, शहर एक तरफ ,

उसके होने का अंतर एक तरफ I 

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चिट्ठी आती थी रोज़...

 चिट्ठी आती थी रोज़ ,

पर उसपे मेरा नाम नहीं था I 

मिलता था वो मुझसे रोज़ ,

पर मेरे लिए कोई पैगाम नहीं था I 

ख्वाब,सपने, सब थे दुनिया में ,

पर मेरे लिए उनका कोई काम नहीं था I 

मैंने तो शुरू किया था मेरी तरफ से,

पर इस कोशिश का कोई अंजाम नहीं था I 

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कंकर, पत्थर, सब कुछ...

 कंकर, पत्थर, सब कुछ,

आईने के दुश्मन सब कुछ I 

दुविधा, भरम के नश्तर, सब कुछ, 

माईने के दुश्मन सब कुछ I 

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Tuesday, October 6, 2026

तो तब तक बस इंतज़ार...

क्यूँ कहें की हम हैं ?

हम होते तो क्या दिखाई न देते ?

क्यूँ कहें हम की सुनो हमें ?

हम होते तो क्या सुनाई न देते ?

जिस दिन हम हवा से बादल,

और बादल से बिजली बनेंगे ,

हम दिखाई भी देंगे ,

हम सुनाई भी देंगे I

तो तब तक बस इंतज़ार...

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Saturday, October 3, 2026

आवाज़ मेरी पत्थर बन गई

 आवाज़ मेरी पत्थर बन गई, 

दुआ में निकली तो ख़्वाब तोड़ गई I


आंसू मेरे कांटे बन गए, 

गालों पे उगे और ,

ज़िन्दगी में सन्नाटे बन गए I 


दिल की धड़कनों  में अड़चनें बुन गईं ,

सांसों की थिरकनों में उलझनें चुन गयीं I 


हम बोलें भी तो सुनाई नहीं देते हैं ,

हम डोलें भी तो दिखाई नहीं देते है I 


हमारा होना हवा बन गया ,

औरों का होना, सोना बन गया ,

दुआ बन गया , दवा बन गया  I 

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सोचा था एक घर बना लूंगा...

 सोचा था एक घर बना लूंगा ,

सोचा था एक असर बना लूंगा  I 


न घर बना  ना असर बना ,

जीवन टूटा शहर बना I 

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