Thursday, April 19, 2018

रेत का घर !



दरवाज़े पे नाम था अपना,
यही घर इनाम था अपना I

ना जाने कितने सपने थे इनमे,
ना जाने कितने अपने थे इनमे I

दीवारों पे छुटकी  की रंगाई थी,
रसोई में दुनिया की महँगाई थीI

आँगन में मुन्ने की किलकरी थी ,
बरामदे में कोयल की गुलुकारी थी I

दीवारों में लोहा सना था,
छत पर छप्पर प्यारी थी I

सब कुछ सही था,
सब कुछ यहीं था I

पर एक दिन एक हवा चली,
हमें लगा की सबा चली,

लेकिन वो तो आँधी थी,
ले उड़ी सब उम्मीदें जो ,
हमने बाँधी थी I

खाक हो गया वो जो सपना था ,
राख हो गया वो जो अपना था I

वो रेत का घर था जो ढह गया,
एक हवा चली सब बह गया I
              
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Sunday, April 15, 2018

उम्मीद थी गुलबों की,वास्ता पड़ा है काँटों से...




उम्मीद थी गुलबों की,वास्ता पड़ा है काँटों से,

उम्मीद थी उजलों की,वास्ता पड़ा है रातों से I


अजीब  सा है रास्ते का मंज़र,

डर लगता है,

कहीं खून बिखरा है कहीं खंज़र I


पहले आँखों में काजल था,

आज फकत सियाही है,

पहले सिने में सोना था,

आज गूंगी गवाही हैI


किस्मत का बदलना,

एक सच्चाई है,

वैसे ही जैसे ,

पानी पे लिखी, लिखाई है I

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कभी कभी कुछ जाने पहचाने ...



कभी कभी कुछ जाने पहचाने ,
अंजाने से लगते हैं I

कभी कभी कुछ रातों के सपने,
बेगाने से लगते हैं I

कभी कभी कुछ होठों के टुकड़े,
अफ़सानो से लगते हैं I

कभी कभी साँसों के चिथड़े ,
एहसानो  से लगते हैं I

कभी कभी शोलों के ओले ,
परवानो से लगते हैं I

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Monday, April 2, 2018

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था...

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था,
कुछ खींचा था, कुछ भींचा था I

सब कुछ ठीक था रातों में,
पर जाने क्या था बातों में I

सूरज की जगह शोला निकला,
भीड़ का एक रैला निकला I

जो आसमान में धुआँ उठा,
पता चला घर से निकला I

वो कहते थे की दंगा है,
भागो भागो
इंसान हुआ अभी नंगा है I

ये वही गली है, जहाँ मेरी दुकाँ थी,
ये वही गली है, जहाँ उसका मकान था I

अब तो,

कालिख है दीवारों पे,चेहरा ज़र्द पड़ा सा है,
आँखें बोझिल,कंधे झुके, गला ज़रा रुंधा सा है I

अब तो सब कुछ बिखरा है,
अब तो सब कुछ छितरा है,
जो कुछ पल पहले निखरा थाI

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था,
कुछ खींचा था ,कुछ भींचा था I
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Friday, March 30, 2018

तुमने तो कहा था

तुमने तो कहा था,

की सब कुछ ठीक हो जाएगा I

तुमने तो कहा था,

की पत्थर से पानी फुटेगा,

अंबर से तारा टूटेगा,

आँखों में नर्मी लौटेगी,

साँसों में गर्मी लौटेगी,

तुमने तो कहा था,

की सब कुछ ठीक हो जाएगा I

तुमने तो कहा था,

अधरों में अमृत प्याला होगा,

चरणों में मनिक्या मतवाला होगा,

सूरज से सोना निकलेगा,

धीरज से जीना निखरेगा,

तुमने तो कहा था,

की सब कुछ ठीक हो जाएगा I

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