Sunday, April 22, 2018

#DefinitelyPTE: A Definitive Answer to English Language Test to Study Abroad!

My friend Rohit wanted to go abroad for doing a Post graduate course in MBA. But there was one hurdle of English test.  He came to know about PTE Academic. To get more knowledge about PTE, he wrote to his engineering school professor Mr. Aiyer.

Here is his reply:

Dear Rohit,

Glad to know that you wish to study abroad for doing an MBA course. As you have stated about the English test hurdle, I would say that PTE Academic is definitive way to surmount the hurdle.

But before PTE Academic,I would like to give you some grounded advice on the situation that one has to face while studying abroad. So far you have stayed in India where in case of any emergency you had support of your parents and friends, but in abroad; you will have to tackle emergency situations on emotional front on your own. In the beginning, you will feel alone and misfit in foreign culture but you will have to give yourself time to get accustomed to the environment there. Furthermore you will have to be smart enough to handle your financial situations on your own.

Now coming on the topic of English Language Test. I think #DefinitelyPTE is the answer to your all woes related to an English Language Test.

PTE is an easy computer-based test to take which assesses your reading, writing, speaking, and listening skills in 3 hours of time. You get the result in just five working days. The PTE scores are accepted worldwide. Some universities that accept the scores are: Stanford University, Harvard University, Imperial College London, Central Queensland University,Andrews University. And on top of everything, you can send the scores to unlimited number of institutions without paying any fee.

You might be wondering if there are any preparatory courses for cracking PTE, then you would be glad to know that it is there, go to and choose any affordable preparatory plan.

One more flexible thing about the test is that you can choose from range of 360 days test options. You can choose from 200 locations worldwide for test. Some of the test location in India are: 1) Aditya Institute of Management, Pune 2) Atam Public School, Ludhiana, Punjab 3) Badruka College of Commerce and Arts, Hyderabad 4) Edwise Consultants Pvt. Ltd. - Coimbatore, Coimbatore, 5) Edwise Consultants Pvt. Ltd., Mumbai  6) Global Opportunities, New Delhi  7) Global Reach, Kolkata

You can find detailed list of test centers on the PTE Academic website.

So to solve an English test hurdle for study abroad #DefinitelyPTE is the answer.
Go ahead and make your future great with PTE Academic.


Saturday, April 21, 2018

अतीत के पन्नो पे...

अतीत के पन्नो पे, कुछ लफ्ज़ लिखे हैं ,
कुछ नाम, कुछ लोग, कुछ नक़्श लिखे हैं I

कुछ पन्नो पे ,एक चौक , एक चौराहा, एक सड़क मिलता है,
कुछ पन्नो पे, एक मुस्कान, एक हँसी ,एक ठहाका, बेधड़क  मिलता है I

कुछ सफो पे, जानी पहचानी रातें मिलती हैं,
कुछ सफो पे, जानी पहचानी बातें मिलती हैं I

कुछ पन्नों पे, सपनो के कुछ टुकड़े मिलते हैं ,
कुछ पन्नो पे, अपनो के कुछ मुखड़े मिलते हैं I

आज लगता है के काश...
सपनो के कुछ टुकड़े अपने होते
के काश...
अपनो के कुछ मुखड़े अपने होते I


Wednesday, April 18, 2018

रेत का घर !

दरवाज़े पे नाम था अपना,
यही घर इनाम था अपना I

ना जाने कितने सपने थे इनमे,
ना जाने कितने अपने थे इनमे I

दीवारों पे छुटकी  की रंगाई थी,
रसोई में दुनिया की महँगाई थीI

आँगन में मुन्ने की किलकरी थी ,
बरामदे में कोयल की गुलुकारी थी I

दीवारों में लोहा सना था,
छत पर छप्पर प्यारी थी I

सब कुछ सही था,
सब कुछ यहीं था I

पर एक दिन एक हवा चली,
हमें लगा की सबा चली,

लेकिन वो तो आँधी थी,
ले उड़ी सब उम्मीदें जो ,
हमने बाँधी थी I

खाक हो गया वो जो सपना था ,
राख हो गया वो जो अपना था I

वो रेत का घर था जो ढह गया,
एक हवा चली सब बह गया I

Sunday, April 15, 2018

उम्मीद थी गुलबों की,वास्ता पड़ा है काँटों से...

उम्मीद थी गुलबों की,वास्ता पड़ा है काँटों से,

उम्मीद थी उजलों की,वास्ता पड़ा है रातों से I

अजीब  सा है रास्ते का मंज़र,

डर लगता है,

कहीं खून बिखरा है कहीं खंज़र I

पहले आँखों में काजल था,

आज फकत सियाही है,

पहले सिने में सोना था,

आज गूंगी गवाही हैI

किस्मत का बदलना,

एक सच्चाई है,

वैसे ही जैसे ,

पानी पे लिखी, लिखाई है I


कभी कभी कुछ जाने पहचाने ...

कभी कभी कुछ जाने पहचाने ,
अंजाने से लगते हैं I

कभी कभी कुछ रातों के सपने,
बेगाने से लगते हैं I

कभी कभी कुछ होठों के टुकड़े,
अफ़सानो से लगते हैं I

कभी कभी साँसों के चिथड़े ,
एहसानो  से लगते हैं I

कभी कभी शोलों के ओले ,
परवानो से लगते हैं I


Monday, April 2, 2018

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था...

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था,
कुछ खींचा था, कुछ भींचा था I

सब कुछ ठीक था रातों में,
पर जाने क्या था बातों में I

सूरज की जगह शोला निकला,
भीड़ का एक रैला निकला I

जो आसमान में धुआँ उठा,
पता चला घर से निकला I

वो कहते थे की दंगा है,
भागो भागो
इंसान हुआ अभी नंगा है I

ये वही गली है, जहाँ मेरी दुकाँ थी,
ये वही गली है, जहाँ उसका मकान था I

अब तो,

कालिख है दीवारों पे,चेहरा ज़र्द पड़ा सा है,
आँखें बोझिल,कंधे झुके, गला ज़रा रुंधा सा है I

अब तो सब कुछ बिखरा है,
अब तो सब कुछ छितरा है,
जो कुछ पल पहले निखरा थाI

कुछ सोचा था, कुछ सिंचा था,
कुछ खींचा था ,कुछ भींचा था I