Wednesday, September 9, 2026

राख पे सोना है!

 राख पे सोना है ,

सुराख़ दिल का हर कोना है I 


थके  थके क़दम ,

आँखें हरदम नम I


अब पता नहीं चलता ,

जिस्म में खून है या ज़हर ,

क़िस्मत में सुकून है या क़हर I 


जहान दिया है तो ज़िन्दगी भी दे,

आसमान दिया है तो परिन्दगी भी दे I 


क्यूं हर कोशिश का हश्र एक होना है,

क्यूं  मुक़द्दर का हर कोना सूना है I 


Friday, March 20, 2026

रेत का घर!

 रेत  का घर,

समंदर का डर I 

कांच के सपने,

दुश्मन होते अपने I 

ख्वाब का शहर,

खूंखार मंज़र I 

गिनती करतीं  सांसें ,

मिटटी में मिलती आसें I

आसमान से बिछड़ता तारा,

जीवन बनता अंगारा I

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