Wednesday, October 7, 2026

दरिया, समंदर एक तरफ...

दरिया, समंदर एक तरफ ,

उसकी आँखों का मंतर एक तरफ I

शाख, शजर एक तरफ ,

उसकी जुल्फों का मंतर एक तरफ I

दुनिया, शहर एक तरफ ,

उसके होने का अंतर एक तरफ I 

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2 comments:

  1. एक के प्रति समर्पण पूरा हो तो बात बन जाती है

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  2. सही कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए धन्यवाद !

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