दरिया, समंदर एक तरफ ,
उसकी आँखों का मंतर एक तरफ I
शाख, शजर एक तरफ ,
उसकी जुल्फों का मंतर एक तरफ I
दुनिया, शहर एक तरफ ,
उसके होने का अंतर एक तरफ I
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दरिया, समंदर एक तरफ ,
उसकी आँखों का मंतर एक तरफ I
शाख, शजर एक तरफ ,
उसकी जुल्फों का मंतर एक तरफ I
दुनिया, शहर एक तरफ ,
उसके होने का अंतर एक तरफ I
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इन फूलों ने ली अंगड़ाई है,
ये हवा उससे मिल के आई है I
ख्वाब का क्या भरोसा, ख्वाब तो ख्वाब हैं,
आज हक़ीक़त मुझसे मिलने आई है I
मुद्दत्तों इंतेज़ार करते रहे इस बियाबाँ में,
आज जा के एक चिड़िया चह - चाहाई है I
आज शाम से हीं उसके जाने का खौफ है दिल में ,
उसके पास होते भी मेरे दिल से लिपटी तन्हाई है I
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खामोश ही था वो,
पर उसकी नज़र बोलती थी I
मेरे दिल में चोर था ,
उसे परत दर परत खोलती थी I
आइना देखना छोड़ दिया हमने ,
अब मेरी सूरत उसकी...
हंसी में छपती थी I
और बारिश में घंटो भीगता था मैं,
तब जा के वो पल भर को बिजली सी कौंधती थी I
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सुनता हूँ तो सुनाई देती है,
देखता हूँ तो दिखाई देती है,
जिस्म टटोलता हूँ तो,
उसकी बुनाई होती है,
रूह टटोलता हूँ तो,
वो ही समाई होती है I
उसके लबों पे मेरा बोसा उधार रहा,
उसकी आँखों की शर्म का मैं बीमार रहा I
बस सपनों में मेरा उसपे अख्तियार रहा,
हकीकत मेरे और उसके बीच एक दीवार रहा I
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