हमने ज़िन्दगी नहीं जहन्नुम जी है ,
जो हम पे टुटा है, उसमें पहाड़ हीं नहीं, आसमान भी है ,
रास्तों में पत्थर, मंज़िलें धुंधली,
इतना हीं नहीं हमारी यात्रा में घोर अपमान भी है I
हम भी हसरतें रखते थे, ख्वाब बुनते थे ,
पर हमारी कहानी में ख्वाब चुराने वाले बेईमान भी हैं I
ऐसा नहीं है की दुनिया खाली है इंसानों से ,
अगर हम आज ज़िंदा हैं तो ज़िन्दगी में कुछ मेहरबान भी हैं I
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