Monday, November 2, 2026

सहसा उसकी खुशबु आई


 सहसा उसकी खुशबु आई,

लगा जैसे वो रु ब रु आई,

उदास तो था कमरा ,

पर लगा जैसे वो मुस्काई ,

क्या हीं वो मंज़र होता ,

रात चाँद, वो, मैं और तन्हाई! 

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