चित्र साभार : Google AI
वो मौन रहता है,
वो खोजता है,
उसके भीतर कौन रहता है I
वो आंखें मूंदे रहता है,
फिर भी वो देखता है ,
जीवन को क्या बींधे रहता है I
वो मनस्वी, वो तपस्वी,
कभी वन में ,
कभी हिमालय की शरण में,
परखता रहता है की,
मुक्ति को क्या बांधे रखता है I
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