राख पे सोना है ,
सुराख़ दिल का हर कोना है I
थके थके क़दम ,
आँखें हरदम नम I
अब पता नहीं चलता ,
जिस्म में खून है या ज़हर ,
क़िस्मत में सुकून है या क़हर I
जहान दिया है तो ज़िन्दगी भी दे,
आसमान दिया है तो परिन्दगी भी दे I
क्यूं हर कोशिश का हश्र एक होना है,
क्यूं मुक़द्दर का हर कोना सूना है I

