सोचा था एक घर बना लूंगा ,
सोचा था एक असर बना लूंगा I
न घर बना ना असर बना ,
जीवन टूटा शहर बना I
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आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 04 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद! !
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