आवाज़ मेरी पत्थर बन गई,
दुआ में निकली तो ख़्वाब तोड़ गई I
आंसू मेरे कांटे बन गए,
गालों पे उगे और ,
ज़िन्दगी में सन्नाटे बन गए I
दिल की धड़कनों में अड़चनें बुन गईं ,
सांसों की थिरकनों में उलझनें चुन गयीं I
हम बोलें भी तो सुनाई नहीं देते हैं ,
हम डोलें भी तो दिखाई नहीं देते है I
हमारा होना हवा बन गया ,
औरों का होना, सोना बन गया ,
दुआ बन गया , दवा बन गया I
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