Saturday, October 3, 2026

आवाज़ मेरी पत्थर बन गई

 आवाज़ मेरी पत्थर बन गई, 

दुआ में निकली तो ख़्वाब तोड़ गई I


आंसू मेरे कांटे बन गए, 

गालों पे उगे और ,

ज़िन्दगी में सन्नाटे बन गए I 


दिल की धड़कनों  में अड़चनें बुन गईं ,

सांसों की थिरकनों में उलझनें चुन गयीं I 


हम बोलें भी तो सुनाई नहीं देते हैं ,

हम डोलें भी तो दिखाई नहीं देते है I 


हमारा होना हवा बन गया ,

औरों का होना, सोना बन गया ,

दुआ बन गया , दवा बन गया  I 

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सोचा था एक घर बना लूंगा...

 सोचा था एक घर बना लूंगा ,

सोचा था एक असर बना लूंगा  I 


न घर बना  ना असर बना ,

जीवन टूटा शहर बना I 

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