जीते तो हैं सब लोग,
पर ज़िन्दगी को दूर से तकते हैं कुछ लोग I
दौड़ते तो है सब लोग,
पर मंज़िल को दूर से तकते हैं कुछ लोग I
संवारते तो हैं सब लोग,
पर ज़िन्दगी को उजड़ते देखते हैं कुछ लोग I
कौन हैं ये कुछ लोग ?
आप नहीं जनाब ,
ये हम हैं, हम हीं हैं वो कुछ लोग I
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