Wednesday, October 7, 2026

चिट्ठी आती थी रोज़...

 चिट्ठी आती थी रोज़ ,

पर उसपे मेरा नाम नहीं था I 

मिलता था वो मुझसे रोज़ ,

पर मेरे लिए कोई पैगाम नहीं था I 

ख्वाब,सपने, सब थे दुनिया में ,

पर मेरे लिए उनका कोई काम नहीं था I 

मैंने तो शुरू किया था मेरी तरफ से,

पर इस कोशिश का कोई अंजाम नहीं था I 

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