Wednesday, September 9, 2026

राख पे सोना है!

 राख पे सोना है ,

सुराख़ दिल का हर कोना है I 


थके  थके क़दम ,

आँखें हरदम नम I


अब पता नहीं चलता ,

जिस्म में खून है या ज़हर ,

क़िस्मत में सुकून है या क़हर I 


जहान दिया है तो ज़िन्दगी भी दे,

आसमान दिया है तो परिन्दगी भी दे I 


क्यूं हर कोशिश का हश्र एक होना है,

क्यूं  मुक़द्दर का हर कोना सूना है I