समय की रूई का महल ,
मोम की मानिंद पिघल रहा है I
दिन रात में, रात दिन में,
जल्दी जल्दी बदल रहा है I
कितना कुछ करना बाक़ी है ,
गिनती शुरू हो गई है , बारी आने वाली है ,
मन डर रहा है, दिल दहल रहा है I
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