Tuesday, October 20, 2026

समय की रूई का महल!

 समय की रूई का महल ,

मोम की मानिंद पिघल रहा है I 

दिन रात में, रात दिन में, 

जल्दी जल्दी बदल रहा है I 

कितना  कुछ करना बाक़ी है ,

गिनती शुरू हो गई है , बारी आने वाली है ,

मन डर रहा है, दिल दहल रहा है I 

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