क्यूँ कहें की हम हैं ?
हम होते तो क्या दिखाई न देते ?
क्यूँ कहें हम की सुनो हमें ?
हम होते तो क्या सुनाई न देते ?
जिस दिन हम हवा से बादल,
और बादल से बिजली बनेंगे ,
हम दिखाई भी देंगे ,
हम सुनाई भी देंगे I
तो तब तक बस इंतज़ार...
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 08 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद! !
बहुत आभार रविंद्र जी !
किसी दिन क्यों इस पल भी हम बिजली हैं, चलती-फिरती आग, एक ऊर्जा, एक शक्ति ! जिसे देखा नहीं महसूस किया जाता है
सच कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए बहुत आभार !
बहुत सुंदर!
आभार शुभा जी !
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 08 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
बहुत आभार रविंद्र जी !
ReplyDeleteकिसी दिन क्यों इस पल भी हम बिजली हैं, चलती-फिरती आग, एक ऊर्जा, एक शक्ति ! जिसे देखा नहीं महसूस किया जाता है
ReplyDeleteसच कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए बहुत आभार !
ReplyDeleteबहुत सुंदर!
ReplyDeleteआभार शुभा जी !
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