Tuesday, October 6, 2026

तो तब तक बस इंतज़ार...

क्यूँ कहें की हम हैं ?

हम होते तो क्या दिखाई न देते ?

क्यूँ कहें हम की सुनो हमें ?

हम होते तो क्या सुनाई न देते ?

जिस दिन हम हवा से बादल,

और बादल से बिजली बनेंगे ,

हम दिखाई भी देंगे ,

हम सुनाई भी देंगे I

तो तब तक बस इंतज़ार...

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6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 08 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!


    !

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  2. बहुत आभार रविंद्र जी !

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  3. किसी दिन क्यों इस पल भी हम बिजली हैं, चलती-फिरती आग, एक ऊर्जा, एक शक्ति ! जिसे देखा नहीं महसूस किया जाता है

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  4. सच कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए बहुत आभार !

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  5. आभार शुभा जी !

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