दरिया, समंदर एक तरफ ,
उसकी आँखों का मंतर एक तरफ I
शाख, शजर एक तरफ ,
उसकी जुल्फों का मंतर एक तरफ I
दुनिया, शहर एक तरफ ,
उसके होने का अंतर एक तरफ I
###
एक के प्रति समर्पण पूरा हो तो बात बन जाती है
सही कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए धन्यवाद !
एक के प्रति समर्पण पूरा हो तो बात बन जाती है
ReplyDeleteसही कहा आपने अनीता जी ! ब्लॉग पे आने के लिए धन्यवाद !
ReplyDelete