आज एक बूंद ओस मिली है,
प्यासे को बस बरबस मिली है I
आज शाख पे कली खिली है,
आज राख में रौशनी मिली है I
आज सूरज की एक किरण मिली है,
आज ख़ुशी से आँखें गीली हैं I
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आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में आज बुधवार 14 अक्तूबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
आभार दिग्विजय जी !
सुंदर सृजन
आभार अनीता जी !
सुंदर
आभार सुशील जी !
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में आज बुधवार 14 अक्तूबर, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
ReplyDeleteआभार दिग्विजय जी !
Deleteसुंदर सृजन
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Deleteसुंदर
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