Wednesday, June 20, 2018

चलो एक सपना देखते हैं ...




Top post on IndiBlogger, the biggest community of Indian Bloggers


आकाश के आँचल में,

एक कल्पना रोपते हैं,

चलो एक सपना देखते हैं I


चाँद जो लिपटा है विज्ञान के जामा में,

उसमें फिर से अपना मामा देखते हैं,

चलो एक सपना देखते हैं I


बहुत हुई ये भगा दौड़ी,

अब बैठते है और बादलों में,

हाथी,तोता,घोड़ा और मैना देखते हैं,

चलो एक सपना देखते हैं I


बहुत हुआ ये कोक,पिज़्ज़ा,बर्गर,

अब फिर से दूध दही का भगोना देखते हैं,

चलो एक सपना देखते हैं I


बहुत हुआ ये हाई-लेवेल इंटेलेक्चुयल ड्रामा,

फिर से जंगल बुक के मोगली,

और मालगुडी के स्वामी का पन्ना खोलते हैं,

चलो एक सपना देखते हैं I

###




4 comments:

  1. Replies
    1. Thanx S Singh for visiting the site and commenting.

      Delete
  2. The joy in simple everyday things is much higher than complex ones. Beautiful poem.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Oh!A visit and comment by the doyen of writing/blogging.Means a lot. Thanx Saru.

      Delete