एक अजीब सी चुप्पी है,
जो कानों को चीरती है I
एक अजीब सी खामोशी है,
जो आडंबर की भाषा बोलती है I
जो चिल्लाते रहे की उनको डर लगता है हिंदोस्ताँ में,
वो मौन हैं आज एक नृशंस अभियान पे I
जो बाप मरा... जो बेटी डरी, ये भी दुनिया ने देखा है,
पर ना जाने क्यूँ वो आज मौन हैं जिन्होने इंसानियत का ले रखा ठेका है I