ये बुतों के गिरने का मौसम है ,
ये इबादतों के मरने का मौसम है I
ये परदों से पंगा लेने का मौसम है,
ये चेहरों के नंगा होने का मौसम है I
ये ज़ोर के मुर्दा होने का मौसम है,
ये भोर के ज़िंदा होने का मौसम है I
ये डर की डोर तोड़ने का मौसम है ,
ये अगर की डगर छोड़ने का मौसम है I
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पश्चलेख : भारत के मी टू अभियान से प्रेरित रचना I
