Friday, March 20, 2026

रेत का घर!

 रेत  का घर,

समंदर का डर I 

कांच के सपने,

दुश्मन होते अपने I 

ख्वाब का शहर,

खूंखार मंज़र I 

गिनती करतीं  सांसें ,

मिटटी में मिलती आसें I

आसमान से बिछड़ता तारा,

जीवन बनता अंगारा I

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