Monday, May 20, 2019

हमने ज़माना देखा है



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हमने ज़माना देखा है,
नये को होते पुराना देखा है,
पेट में भूख और मुट्ठी में,
बस एक दाना देखा है I

हमने आँखों से नींद...
का खो जाना देखा है,
जो लबों तक आते आते,
रह गया वो पैमाना देखा है I

हमने साँसों में शीशे,
का घुल जाना देखा हैI
हमने प्यासों का साग़र,
में मार जाना देखा है I

हमने उदास आँखों का,
बरबस भर जाना देखा है I
हमने उफनते साहस का,
भी एकबारगी सिहर जाना देखा है I

हमने अपना होते बेगाना देखा है,
सपनों का मर जाना देखा है,
साहब हमने ज़माना देखा है I
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10 comments:

  1. Amazing! Thank you for sharing this.

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  2. जिंदगी की सच्चाई बहुत ही सुंदर तरह से साझा की नीरज 👌👌

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  3. बहुत अच्छी लिखी कविता नीरज।

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  4. जिंदगी की कड़वी सच्चाई को बहुत ही खूबसूरतती से व्यक्त किया हैं आपने।

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    1. धन्यवाद ज्योति जी !

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  5. Just awesome...specially loved the last stanza.

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    1. Thanks jyotirmoy for appreciation of the post.

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